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टीचर / शिक्षक शिक्षण में करियर | Career in teaching in Hindi

Careers in education sector 

शिक्षा के क्षैत्र में करियर की कमी नहीं है ।
युवाओं में टीचिंग प्रोफेशन को लेकर रुझान बढ़ा रहा है.

 टीचिंग फील्ड में जॉब के भी बेहतरीन अवसर भी हैं.

प्राइवेट स्कूल से लेकर सरकारी स्कूलों तक में जॉब के अपार ऑप्शन हैं.


आप अपना कोचिंग सेंटर भी खोल सकतें हैं.
लेकिन टीचर बनने के लिए किसी विषय में सिर्फ कोर्स करना ही काफी नहीं है. इसके लिए आपको कुछ विशेष परीक्षाएं भी पास करनी होंगी.

यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस कक्षा के छात्र को पढ़ाना चाहते हैं और आपकी परीक्षा भी उसी आधार पर ली जाएगी.

जैसे TET,  UJC NET

टीचर कैसे बने / शिक्षक बनने के लिए क्या करें / करियर परिक्षा



How to become a teacher? / teacher kaise bane / konsa exam de. Career in teaching in Hindi 


टीचर,  अधिकतर लोग टिचर बनना चाहते हैं क्योंकि इसमें रूपया,  शौहरत दोनों मिलता है । और आराम भी । जोखिम भी कम ।

अध्यापक बनने के लिए 12th पास होना जरूरी है इसके बाद आप rajasthan में  STC / BSTC

नर्सिंग टीचर ट्रेनिंग आदी चुनाव सकते हैं ।

courses become a teacher 


1. TGT और PGT परीक्षा

टीजीटी और पीजीटी परीक्षा राज्य स्तर में आयोजित की जाती है. 

टीजीटी परीक्षा में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को ग्रेजुएट और बीएड होना अनिवार्य है और वही पीजीटी परीक्षा के लिए उम्मीदवार को पोस्ट ग्रेजुएट के साथ बीएड पास होना भी अनिवार्य है.

यदि उम्मीदवार टीजीटी परीक्षा उत्तीर्ण कर लेता है. तो वह शिक्षक के रूप में 6th क्लास से 10th क्लास के बच्चों को पढ़ा सकता है. 

यदि उम्मीदवार पीजीटी परीक्षा पास कर लेता है तो वह 10th क्लास से 12th क्लास तक के बच्चों को पढ़ा सकता है.


2. TET

उम्मीदवार बीएड परीक्षा के बाद TET यानी कि Teacher Eligibility Test परीक्षा में भी भाग ले सकता है. यदि उम्मीदवार का अभी बीएड परीक्षा का रिजल्ट नहीं आया है तो भी उम्मीदवार परीक्षा में सम्म्लित हो सकते हैं. 

यदि उम्मीदवार टीईटी परीक्षा में पास हो जाते हैं तो उन्हें राज्य सरकार द्वारा कुछ निश्चित समय तक एक सर्टिफिकेट प्राप्त होता है. इस सर्टिफिकेट की अवधि लगभग 5 से 7 वर्ष तक होती है. 

इन वर्षों के दौरान ही उम्मीदवार टीचर भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं. अगर उम्मीदवार को इस वर्षों के दौरान जॉब नहीं मिल पाती है तो उसे दोबारा TET परीक्षा देनी होगी, क्योंकि 7 साल बाद TET सर्टिफिकेट लैप्स हो माना जाएगा.


3. यूजीसी नेट

यदि उम्मीदवार कॉलेज में लेक्चरर की नौकरी चाहता है तो उस उम्मीदवार को यह परीक्षा पास करनी पड़ती है. 

UGC नेट की यह परीक्षा साल में दो बार दिसंबर और जून माह में आयोजित की जाती है. इस परीक्षा में तीन एग्जाम होते हैं. 

उम्मीदवार इंग्लिश या हिंदी में से किसी भी भाषा का प्रयोग करके UGC नेट की परीक्षा दे सकता है. 

पहले एग्जाम में सामान्य ज्ञान, टीचिंग एप्टीट्यूट, व् रीजनिंग से सम्बंधित प्रस्न पूछे जाते है और दूसरे व तीसरे एग्जाम में उम्मीदवार द्वारा चुने गए विषयों से सम्बंधित सवाल पूछे जाते हैं.

फार्मा में करियर Career in Pharma management in Hindi

करियर

फार्मा मैनेजमेंट में करियर

फार्मा में करियर Career in Pharma management in Hindi

आज स्वास्थ्य का क्षेत्र निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। लोग अच्छी एवं गुणवत्तापरक सुविधाओं की आशा करने लगे हैं।
बदलती जीवनशैली में लोग अपने स्वास्थ्य पर अच्छी तरह से ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे में लोगों का जीवन दवाओं के सहारे चल रहा है।
आज भारत में दवा उद्योग 15000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया है। पिछले कई वर्षों में दवा उद्योग में निजी संगठनों एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश करने से दवा उद्योग की सूरत एवं सीरत दोनों में खासा परिवर्तन आया है। दवा उद्योग के बढ़ते दायरे के स्वरूप इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं।
फार्मा मैनेजर्स की मांगवर्तमान में फार्मा क्षेत्र में अच्छी गुणवत्ता प्रदान करने के लिए फार्मा मैनेजरों की आवश्यकता है। अगर आप भी प्रबंधन के क्षेत्र में ऐसे कॅरियर विकल्पों की खोज कर रहे हैं, जिसमें आपके लिए अवसरों की कमी नहीं है तो फार्मा मैनेजमेंट आपके लिए अच्छा कॅरियर ऑप्शन साबित हो सकता है।

योग्यता
न्यूनतम 3 वर्ष की अवधि की स्नातक उपाधि (फार्मेसी, विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, मेडिसिन) प्राप्त विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते हैं। स्नातक उपाधि में सकल 50 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। साथ ही सीएटी,एमएटी, सीएमएटी, एटीएमए, एक्सएटी, जीपीएटी स्कोर जरूरी है। 2016 में स्नातक उपाधि के आखिरी वर्ष की परीक्षा देने वाले प्रत्याशी भी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में दो वर्ष का कार्यानुभव रखने वाले छात्र भी इस पाठ्यक्रम में आवेदन कर सकते हैं।

फार्मा मैनेजमेंट का क्षेत्र 
फार्मा मैनेजर फार्मा सेलिंग, मेडिकल डिवाइस मार्केटिंग, मार्केटिंग कम्यूनिकेशन, क्वालिटी कंट्रोल मैनेजमेंट, ड्रग स्टोर, मैनेजमेंट, प्रॉडक्शन प्लानिंग आदि क्षेत्रों में कार्य कर सकते हैं। फार्मा मैनेजर हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और कंपनी के बीच की कड़ी होते हैं। फार्मा कंपनियां फार्मा मैनेजरों को हायर करती हैं ताकि वे ग्राहकों और डाक्टर्स को प्रॉडक्ट की उपयोगिता के प्रति जागरुक कर सकें। कंपनियां नियुक्ति के बाद एनेटॉमी, फिजियोलोजी, फार्माकोलोजी, सेल्समैनशिप, की ट्रेनिंग के साथ प्रॉडक्ट की नॉलेज और फील्ड ट्रेनिंग देती। फार्मा मैनेजर उत्पादों के निर्माण से लेकर उनके विक्रय तक में योगदान देते हैं।
अवसरफार्मा इंडस्ट्री में तेजी से हो रहे विकास के कारण इस क्षेत्र में कॅरियर की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

फार्मा मैनेजमेंट में एमबीए करने के बाद छात्रों की एरिया मैनेजर, सर्किल मैनेजर, प्रॉडक्ट मैनेजर, क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर या मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में नियुक्ति हो सकती है। फार्मा मैनेजमेंट में एमबीए करने के बाद मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, मेडिकल रिप्रजेन्टेटिव, बिजनेस एग्जीक्यूटिव आदि के रूप में नियुक्ति होती है।

पैकेज फार्मा मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री करने वाले छात्रों का शुरुआती पैकेज 5 से 6 लाख रुपए सालना तक होता है। इंटरनेशनल दवा कंपनियों में अनुभवी प्रोफेशनल्स को सालाना 20 से 25 लाख रुपए तक का पैकेज मिलता है, लेकिन ऊंचे पैकेज और जिम्मेदारी वाली नौकरियां 15 से 20 फीसदी उम्मीदवारों को ही मिल पाती है, क्योंकि इसके लिए ग्लोबल फार्मा इंडस्ट्री की नॉलेज जरूरी है।
प्रमुख संस्थान फार्मा मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के लिए कुछ प्रमुख संस्थान हैं- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मा मार्केटिंग, लखनऊ, इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, वर्धा, आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी, जयपुर, एनआईपीईआर, मोहाली आदि।